कई गंभीर बीमारियों के लिए रामबाण है पत्थरचट्टा, आयुर्वेद में है खास महत्व

कई गंभीर बीमारियों के लिए रामबाण है पत्थरचट्टा, आयुर्वेद में है खास महत्व

आयुर्वेद में पेड़, पौधे, पत्तियों आदि का बड़ा महत्व है। आयर्वेद का मानना है कि ऐसी कोई वनस्पति नहीं है, जिसकी कोई दवा न बन सके। ऐसा ही एक पौधा है पत्थरचट्टा, जो कई गम्भीर बीमारियों का इलाज है। पत्थरचट्टा एक आयुर्वेदिक पौधा है, जिसमें कई औषधीय गुण होते हैं, इतने गुणों से भरपूर होने की वजह से इसे एयर प्लांट, कैथेड्रल बेल्स, लाइफ प्लांट और मैजिक लीफ आदि नामों से जानते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इसका सदियों से किडनी और मूत्र विकारों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में किया जाता रहा है, इसकी मदद से पथरी के लिए रामबाण है। इसके अलावा यह पेट की सफाई करने और जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी काफी उपयोगी है, यह बवासीर में भी काफी लाभदायक होता है। इस घरेलू पौधे का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्‍सा में उपयोग किया जाता है।

पत्थरचट्टा में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल, एंटीमिक्राबियल, एंटीफंगल, एंटीहिस्‍टामाइन और एनाफिलेक्टिक गुण होते हैं जो कि लगभग सभी प्रकार की बीमारियों को कम करने में मदद करते हैं। पत्थरचट्टा को आयुर्वेद में गुर्दे की पथरी के लिए रामबाण माना गया है, अगर इसका काढ़ा पिया जाए तो पेशाब में जलन, पेशाब का रुक-रुककर आना, दर्द होना जैसी पेशाब की समस्याओं को ठीक किया जा सकता है।

इसके सेवन से हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या को भी ठीक किया जा सकता है, इसके पत्तों का रस निकालकर पांच-पांच बूंद पानी में मिलाकर रोज खाली पेट पीना लाभकारी रहेगा, हालांकि इन मामलों में विशेषज्ञों या चिकित्सकों की राय ले लेना भी सही रहेगा। पत्थरचट्टे के 4-5 पत्तों को पीसकर एक लेप तैयार कर सकते हैं और उसे घाव, चोट वाली जगह पर लगा सकते हैं, ऐसा करने से रोगी को तुरंत आराम मिलेगा। शरीर पर हुए रैशेज या खुजली की समस्या भी इससे ठीक होती है।

वहीं यदि किसी महिला को वेजाइनल इंफेक्शन की शिकायत है और प्राइवेट एरिया में खुजली, जलन के साथ-साथ वेजाइनल डिस्चार्ज हो रहा है तो पत्थरचट्टा की मदद से वेजाइना में सूजन, जलन, खुजली आदि से निजात मिल सकती है, इसके लिए आप इसके पत्तों को उबालकर काढ़ा बना लें और शहद डालकर इसका सेवन करें।

पत्थरचट्टे का सेवन से खूनी दस्त को रोकने में काफी मदद मिलती है, इसके लिए आप इसके पत्तों से रस निकालें और उसमें चुटकी भर पीसा हुआ जीरा और आधा चम्मच देशी घी डालकर अच्छी तरह मिला लें, इस मिश्रण का सेवन दिन में दो बार करने से रोगी को आराम मिलेगा।

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